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Friday, December 24, 2010

गणित मैं एक नई खोज (दमदार अंक 9)



गणित मैं एक नई खोज (दमदार अंक 9)
दादरी के पियुश्दाद्रिवाला,दुनिया की पहली मिरर imaj पुस्तक "श्री मद भाग वाद गीता" के सभी १८ अद्द्ययो,७०० श्लोकों को हिंदी व् अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिख"वर्ल्ड रिकार्ड व् एशिया बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज करा कर एक इतिहास बना चुके पियुश्दाद्रिवाला ने अब एक और नया करना कर दिखाया हैं.दाद्रिवाला की अभी हाल ही में उनकी पुस्तक"गणित एक अध्यन" प्रकाशित हो चिकि हैं.जिसमें उन्होंने अपने दुवारा सिद्ध किये गए कई नई तरीके इजाद किये हैं. दाद्रिवाला यांत्रिक इंजीनिर और एक बहु रास्ट्रीय कम्पनी में कार्यरत हैं.पियूष ने पास्कल त्रिभुज पर कारिय किया और कई विशेस्ताये उस त्रिभुज के बारे में पता लगाई.पास्कल त्रिभुज,प्य्तागोरस परमे व् पिरामिड की सहायता से यह सत्यापित करने की कोसिस की हैं जो हम गिनती १ से लेकर ९ तक कर ते हैं वो गलत हैं,यह ० से लेकर ९ तक होनी चाहिए. दाद्रिवाला ने गिनतिय विधि से यह भी सिद्ध किया हैं की पिरामिड वाकई असीम उर्जा का स्थान हैं. दाद्रिवल ने एक महत्व पूरण खोज की हैं,"समकोण तिरभुज" में एक नया नाम "समान्तर श्रेणी समकोण तिरभुज" दिया हैं.जिसको उन्होंने तिन तरीको बीजगणित,त्रिकोंमिति,कोर्दिनत ज्योमित्री से सिद्ध किया हैं.पियूष ने अपनी पुस्तक में अंक ९ पर भी कार्य किया हैं.और उनका यह कहना हैं की यह दुनिया अंक ९ पर ही निर्भर हैं.इसको वो एइस्तिन के विशव प्रसिद सूत्र E=MC(स्कायर2) से जोड़ते हैं.(चूँकि c का मतलब परकास की चाल जो तिन गुना १० की घात ८ हैं जो क स्कायर के रूप में है,यानि ३ गुना १० की घात का स्कायर=९ गुना १० की घात १६,अब हम ९ की किसी भी संख्या से गुना करे तो उनके अलग -अलग अंको का योग ९ ही आता हैं). m द्रव्य मान से कितनी उर्जा उत्सर्जित होगी इसके लिए द्रव्य मान को परकाश के चाल के वर्ग से गुना करना होगा जो हमेशा ९ ही आएगा.अतः दुनिया अंक ९ पर ही निर्भर हैं.(९ ही देवियाँ हैं,९ ही grah हैं,और ९ ही पियूष नियतांक हैं.
उदाहरन के लिए हम यहाँ दो-दो अंको की दो राशियों लेते हैं-
२४ व् ३१ इनको हम ४ तरीकों से लिख सकते हैं जैसे-
२४ x ३१ =७४४
२४ x १३ = ३१२
४२ x ३१ = १३०२
४२ x १३ = ५४६
अब इन संखयों से क्रम से सभी छोटी संखयों को एक - एक करके घटाओ , प्राप्त संख्या होगी-
१३०२ - ७४४ = ५५८ = ५+ ५ + ८= १८ = १ + ८ = 9
१३०२ - ५४६ =७५६ = ७ + ५ + ६ = १८ = १ + ८ =९
१३०२ - ३१२ = ९९०= ९ + ९ + ० = १८ = १ + ८ = ९
७४४ - ५४६ = १९८ = १ + ९ + ८ = १८ = १ + ८ = ९
७४४ - ३१२ = ४३२ = ४ + ३ + २ = ९
५४६ - ३१२ = २३४ = २३४ = २ +३ + ४ = ९
के अलग - अलग अंको का योग हमेसा ९ ही आयेगा.यही "पियूष नियतांक" हैं.

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